Second National Prakrit Seminar
प्राकृत सेमिनार 2024 में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों और विद्वानों ने प्राकृत भाषा और संस्कृति पर गहन विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर अनेक सत्रों, कार्यशालाओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से प्राकृत भाषा की महत्ता और उसकी धरोहर को पुनः जागरूक किया गया। सेमिनार में प्राचीन और आधुनिक प्राकृत साहित्य, उसकी संरचना, तथा समाज पर इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में श्रोताओं को न केवल ज्ञानवर्धन का अवसर मिला, बल्कि प्राकृत भाषा से जुड़ी नई दिशा और दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला गया। यहां की गई चर्चाएं और प्रस्तुतियां न केवल विद्वानों के लिए, बल्कि प्राकृत भाषा के प्रति रुचि रखने वाले आम लोगों के लिए भी प्रेरणादायक रही। इस आयोजन के माध्यम से प्राकृत भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया।